हर प्रकार की प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसके अधिकार में वह सब कुछ है जो आकाशों में है और जो धरती में है। और आख़िरत (परलोक) में भी उसी के लिए प्रशंसा है और वह पूर्ण हिकमत वाला, सबकी खबर रखने वाला है।
वह जानता है जो कुछ धरती के भीतर प्रवेश होता है और जो कुछ उससे निकलता है, तथा जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। तथा वह अत्यंत दयावान्, अति क्षमाशील है।
तथा काफ़िरों ने कहा कि हमपर क़ियामत नहीं आएगी। आप कह दें : क्यों नहीं? मेरे पालनहार की क़सम! जो परोक्ष का जानने वाला है, वह तुमपर अवश्य आएगी। उससे एक कण के बराबर भी कोई चीज़ ओझल नहीं रहती न आकाशों में और न धरती में, तथा न उससे छोटी कोई चीज़ है और न बड़ी, परंतु वह एक स्पष्ट पुस्तक में (अंकित) है।
तथा जिन लोगों ने हमारी आयतों को नीचा दिखाने का प्रयास किया, उन लोगों के लिए कठोर दुःखदायी यातना है।
34:6
wayarā alladhīna ūtū l-ʿil'ma alladhī unzila ilayka min rabbika huwa l-ḥaqa wayahdī ilā ṣirāṭi l-ʿazīzi l-ḥamīdi
तथा जिन लोगों को ज्ञान दिया गया है, वे जानते हैं कि जो कुछ आपपर आपके पालनहार की ओर से उतारा गया है, वही सत्य है, तथा वह सर्व प्रभुत्वशाली, सर्वप्रशंसित (अल्लाह) के मार्ग की ओर ले जाता है।
तथा जिन लोगों ने इनकार किया, वे कहते हैं कि क्या हम तुम्हें एक ऐसा आदमी बताएँ, जो तुम्हें सूचना देता है कि जब तुम पूर्णतया चूर-चूर कर दिए जाओगे, तो तुम अवश्य एक नई रचना में आओगे?
34:8
aftarā ʿalā l-lahi kadhiban am bihi jinnatun bali alladhīna lā yu'minūna bil-ākhirati fī l-ʿadhābi wal-ḍalāli l-baʿīdi
क्या उसने अल्लाह पर झूठ गढ़ा है या उसमें पागलपन है? बल्कि जो लोग आख़िरत पर विश्वास (ईमान) नहीं रखते, वे यातना तथा दूर की गुमराही में हैं।
34:9
afalam yaraw ilā mā bayna aydīhim wamā khalfahum mina l-samāi wal-arḍi in nasha nakhsif bihimu l-arḍa aw nus'qiṭ ʿalayhim kisafan mina l-samāi inna fī dhālika laāyatan likulli ʿabdin munībin
क्या उन्होंने अपने आगे और पीछे आकाश और धरती को नहीं देखा? यदि हम चाहें तो उन्हें धरती में धँसा दें या उनपर आकाश के टुकड़े गिरा दें। निःसंदेह इसमें हर उस बंदे के लिए अवश्य एक निशानी है, जो अल्लाह की ओर लौटने वाला है।
तथा हमने दाऊद को अपना अनुग्रह प्रदान किया। ऐ पर्वतो! उसके साथ अल्लाह की पवित्रता बयान करो तथा पक्षियों को भी (यही आदेश दिया) तथा हमने उसके लिए लोहा को नरम कर दिया।
तथा (हमने) सुलैमान के लिए हवा को (वशीभूत कर दिया)। उसका सुबह का चलना एक महीने का तथा शाम का चलना एक महीने का होता था। तथा हमने उसके लिए तांबे का स्रोत बहा दिया। तथा कुछ जिन्नों को भी (उसके वश में कर दिया), जो उसके सामने उसके पालनहार की अनुमति से काम करते थे। तथा उनमें से जो भी हमारे आदेश से फिरेगा, हम उसे भड़कती आग की यातना चखाएँगे।
34:13
yaʿmalūna lahu mā yashāu min maḥārība watamāthīla wajifānin kal-jawābi waqudūrin rāsiyātin iʿ'malū āla dāwūda shuk'ran waqalīlun min ʿibādiya l-shakūru
वे उसके लिए बनाते थे, जो वह चाहता था; भवन (मस्जिदें), प्रतिमाएँ, हौज़ोंके जैसे बड़े-बड़े लगन तथा एक ही जगह जमी हुई देगें। ऐ दाऊद के परिजनो! कृतज्ञता के तौर पर सत्कर्म करो। और मेरे बंदों में थोड़े ही लोग कृतज्ञ हैं।
फिर जब हमने सुलैमान की मौत का निर्णय कर दिया, तो जिन्नों को उसकी मौत का पता एक घुन के सिवा किसी ने नहीं दिया, जो उसकी लाठी को खा रहा था। फिर जब वह गिर गया, तो जिन्नों पर यह बात खुली कि यदि वे परोक्ष का ज्ञान रखते, तो इस अपमानकारी यातना में पड़े न रहते।
सबा जाति के लिए उनके निवास-स्थान में एक निशानी थी। (उसके) दाएँ और बाएँ दो बाग़ थे। (हमने कहा था :) अपने पालनहार की दी हुई रोज़ी से खाओ और उसके प्रति आभार प्रकट करो। (यह) एक अच्छा शहर है तथा अति क्षमाशील पालनहार है।
लेकिन उन्होंने मुँह फेर लिया, तो हमने उनपर भयंकर (बाँध तोड़) बाढ़ भेज दी, तथा उनके दोनों बाग़ों को दो ऐसे बाग़ों से बदल दिए, जिनमें कड़वे-कसैले फल, झाऊ के वृक्ष तथा कुछ थोड़े-से बेर थे।
और हमने उनके बीच तथा उन बस्तियों के बीच, जिनमें हमने बरकत रखी थी, एक-दूसरे से दिखाई देने वाली बस्तियाँ बना दी थीं, तथा हमने उनमें यात्रा के पड़ाव निर्धारित कर दिए थे (और कह दिया था :) तुम उनमें रात-दिन निश्चिंत होकर चलो फिरो।
तो उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमारी यात्राओं के बीच दूरी बना दे! तथा उन्होंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया। अंततः हमने उन्हें कहानियाँ बना दिया और उन्हें पूरी तरह तित्तर-बित्तर कर दिया। निःसंदेह इसमें हर बड़े धैर्यवान् और बहुत शुक्र करने वाले के लिए कई निशानियाँ (शिक्षाएँ) हैं।
34:20
walaqad ṣaddaqa ʿalayhim ib'līsu ẓannahu fa-ittabaʿūhu illā farīqan mina l-mu'minīna
तथा इबलीस ने उनपर अपना गुमान सच कर दिखाया। चुनाँचे ईमान वालों के एक समूह को छोड़कर सब ने उसका अनुसरण किया।
34:21
wamā kāna lahu ʿalayhim min sul'ṭānin illā linaʿlama man yu'minu bil-ākhirati mimman huwa min'hā fī shakkin warabbuka ʿalā kulli shayin ḥafīẓun
हालाँकि उसका उनपर कोई ज़ोर (दबाव) नहीं था। लेकिन ऐसा इसलिए हुआ ताकि हम जान लें कि कौन आख़िरत पर ईमान लाता है और कौन उसके बारे में संदेह में पड़ा हुआ है। तथा आपका पालनहार प्रत्येक चीज़ का संरक्षक है।
34:22
quli id'ʿū alladhīna zaʿamtum min dūni l-lahi lā yamlikūna mith'qāla dharratin fī l-samāwāti walā fī l-arḍi wamā lahum fīhimā min shir'kin wamā lahu min'hum min ẓahīrin
(ऐ नबी) आप कह दें : उन्हें पुकार कर देखो, जिन्हें तुमने अल्लाह के सिवा (पूज्य) समझ रखा है। वे आकाशों और धरती में कणभर भी अधिकार नहीं रखते, और न उन दोनों में उनकी कोई साझेदारी है और न उनमें से कोई उस (अल्लाह) का सहायक ही है।
और उसके यहाँ केवल उस व्यक्ति की सिफ़ारिश लाभ देगी, जिसे अल्लाह अनुमति देगा। यहाँ तक कि जब उनके दिलों से घबराहट दूर कर दी जाती है, तो वे (फ़रिश्ते) कहते हैं : तुम्हारे पालनहार ने क्या कहा? वे कहते हैं : सत्य (कहा) तथा वह सर्वोच्च, बहुत महान है।
34:24
qul man yarzuqukum mina l-samāwāti wal-arḍi quli l-lahu wa-innā aw iyyākum laʿalā hudan aw fī ḍalālin mubīnin
आप (मुश्रिकों से) प्रश्न करें : तुम्हें आकाशों तथा धरती से कौन जीविका प्रदान करता है? आप कह दें : अल्लाह। तथा निःसंदेह हम या तुम अवश्य सन्मार्ग पर हैं अथवा खुली गुमराही में हैं।
आप कह दें कि हमारा पालनहार हमें एकत्रित करेगा। फिर हमारे बीच सत्य के साथ निर्णय करेगा तथा वही अति निर्णयकारी, सब कुछ जानने वाला है।
34:27
qul arūniya alladhīna alḥaqtum bihi shurakāa kallā bal huwa l-lahu l-ʿazīzu l-ḥakīmu
आप कह दें : तुम मुझे वो लोग दिखाओ, जिन्हें तुमने साझी ठहराकर अल्लाह के साथ मिला दिया है? ऐसा कदापि नहीं है। बल्कि वही अल्लाह अत्यंत प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।